LPG संकट का असर: गैस की कमी से बढ़ी इंडक्शन चूल्हों की मांग, कई शहरों में स्टॉक खत्म
देश के कई हिस्सों में रसोई गैस (LPG) की आपूर्ति प्रभावित होने की खबरों के बीच लोगों में चिंता बढ़ गई है। गैस सिलेंडर की कमी और डिलीवरी में देरी के कारण अब बड़ी संख्या में लोग इंडक्शन चूल्हों और अन्य इलेक्ट्रिक किचन उपकरणों की ओर रुख कर रहे हैं। इस अचानक बढ़ी मांग के कारण कई शहरों में इंडक्शन चूल्हे दुकानों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर “आउट ऑफ स्टॉक” हो गए हैं।
गैस संकट क्यों बढ़ा
रिपोर्टों के अनुसार पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री मार्गों पर असर के कारण LPG सप्लाई को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए सप्लाई चेन प्रभावित होने से घरेलू बाजार में भी असर देखने को मिल रहा है।
इसके अलावा कुछ जगहों पर कमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति सीमित किए जाने और घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने जैसे फैसलों से भी बाजार में अस्थायी कमी की स्थिति बन गई है।
इंडक्शन चूल्हों की बिक्री में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
गैस की कमी की खबरों के बाद इलेक्ट्रिक इंडक्शन चूल्हों की मांग अचानक बढ़ गई है। कई ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर इंडक्शन चूल्हों की बिक्री सामान्य से कई गुना बढ़ गई है और कुछ जगहों पर स्टॉक खत्म हो गया है।
कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर इंडक्शन की बिक्री में 30 गुना तक उछाल दर्ज किया गया।
फ्लिपकार्ट जैसे प्लेटफॉर्म पर पिछले कुछ दिनों में बिक्री चार गुना तक बढ़ गई।
कई शहरों में दुकानदारों के पास रोज़ बड़ी संख्या में ग्राहक इंडक्शन खरीदने पहुंच रहे हैं।
कई शहरों में स्टॉक खत्म
दिल्ली, नोएडा, हैदराबाद, कुशीनगर और अन्य शहरों में इलेक्ट्रॉनिक दुकानों पर इंडक्शन चूल्हों की मांग इतनी तेज हो गई है कि कई दुकानों और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर यह “आउट ऑफ स्टॉक” हो चुके हैं।
क्विक-कॉमर्स ऐप्स जैसे ब्लिंकिट, जेप्टो और स्विगी इंस्टामार्ट पर भी कई मॉडल उपलब्ध नहीं हैं, क्योंकि लोग गैस खत्म होने के डर से पहले ही वैकल्पिक व्यवस्था कर रहे हैं।
छोटे कारोबारियों पर भी असर
गैस की कमी का असर केवल घरों तक ही सीमित नहीं है। चाय की दुकानों, छोटे होटल और फूड स्टॉल चलाने वाले लोगों को भी परेशानी हो रही है। कई छोटे व्यापारी अब कोयले की भट्ठी या इलेक्ट्रिक उपकरणों का इस्तेमाल करने लगे हैं।
सरकार की तैयारी
सरकार ने गैस सप्लाई की निगरानी बढ़ा दी है और घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उत्पादन बढ़ाने और सप्लाई बनाए रखने के लिए पेट्रोलियम कंपनियों को निर्देश जारी किए गए हैं।
निष्कर्ष